दिल चुराना आपकी आदत-सी लगती है
तड़पता छोड़कर चल देने आपकी अदात-सी लगती है!
मौसम हसी था जब चोरी हुवा था दिल मेरा
उल्टा चोर बनाना मुझे आपकी अदात-सी लगती है!
हुआ बदनाम ज़माने में सारे रास्ते जुदा हो गये
बीच मजधार छोड़कर चल देना आपकी आदत-सी लगती है!
सारी रियासते 'मौत' का मेरी फरमान जारी कर चुकी
दामन बचा कर चल देना आपकी आदत-सी लगती है!
आँखों के इन दरिन्चो में बसाया था कभी
आंसू समझकर गिरा देना आपकी-सी लगती है!
घर मेरा जलता रहा 'मस्ताना' सामने तुम्हारे
पानी नहीं हवा देना आपकी आदत-सी लगती है!
( जे.पी.मस्ताना )

